आईसेक्ट विश्वविद्यालय हजारीबाग में भारतीय ज्ञान परंपरा पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन 22 अगस्त को किया जाएगा। सेमिनार का विषय भारतीय ज्ञान प्रणालियों के माध्यम से विकास की पुनर्कल्पना : 2047 तक विकसित भारत के लिए एक समग्र दृष्टिकोण रखा गया है। इसका आयोजन विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग की ओर से आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के सहयोग से किया जा रहा है, जबकि आईसीएसआर इसके प्रायोजक हैं।
सेमिनार का उद्देश्य भारतीय ज्ञान, बौद्धिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर विमर्श करना है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ गौरव शुक्ला ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणालियां केवल हमारी गौरवशाली विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की विकास चुनौतियों के समाधान का महत्वपूर्ण आधार हैं। परंपरागत ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर भारत को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार, ज्ञान आधारित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की दिशा में सार्थक कदम उठाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों से विशेषज्ञों को इस सेमिनार में आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि सेमिनार में मुख्य तौर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, शासन, पर्यावरण संरक्षण, कृषि, नैतिकता और सामुदायिक जीवन जैसे क्षेत्रों में भारतीय ज्ञान परंपराओं की भूमिका पर चर्चा होगी। साथ ही पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक से जोड़कर सतत, समावेशी और आत्मनिर्भर विकास की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
कार्यक्रम में शिक्षाविद, शोधकर्ता, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और विद्यार्थी भाग लेंगे।