आधुनिक शिक्षा को भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कारों से जोड़ने की दिशा में आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग में मंगलवार को नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ-2026 कार्यक्रम का आयोजन वैदिक रीति एवं गुरुकुल परंपरा के अनुरूप किया गया। विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में नए विद्यार्थियों का तिलक एवं अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया गया तथा पारंपरिक हवन पूजन के माध्यम से उनके शैक्षणिक जीवन की मंगलमय शुरुआत की कामना की गई।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण गुरुकुल परंपरा के अनुरूप आयोजित हवन पूजन रहा, जिसे योग प्राध्यापक मनीष कुमार ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया। हवन के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, अनुशासन, सकारात्मक चिंतन और जीवन मूल्यों के महत्व से अवगत कराया गया। विश्वविद्यालय परिसर वैदिक मंत्रों से गूंज उठा और पूरा वातावरण आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक रंग में रंगा नजर आया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियां एवं उपलब्धियां प्रोजेक्टर के जरिए प्रस्तुत की गई।
इस मौके पर कुलपति डॉ गौरव शुक्ला ने कहा कि भारतीय शिक्षा परंपरा में ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। दीक्षारंभ कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को इसी समृद्ध विरासत से जोड़ते हुए आधुनिक शिक्षा के लिए तैयार करना है।
कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रवेश केवल शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में पहला कदम है। गुरुकुल परंपरा विद्यार्थियों को अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यबोध की सीख देती है।
समकुलपति डॉ एसआर रथ ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल भावना शिक्षा को जीवन से जोड़ना है। विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी आत्मसात करना चाहिए।कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के अध्यादेश के अनुरूप शपथ दिलाई गई तथा विभागाध्यक्षों द्वारा उन्हें संबंधित विभागों की जानकारी दी गई।
संचालन डॉ प्रीति व्यास ने किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, उप कुलसचिव, सहायक कुलसचिव, प्राध्यापक-प्राध्यापिकाएं, कर्मी एवं बड़ी संख्या में नवप्रवेशित विद्यार्थी उपस्थित थे।