हजारीबाग। आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग के समाजशास्त्र विभाग की ओर से भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद-ईआरसी, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के प्रायोजन में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शनिवार को संपन्न हुई। भारत में जनजातीय विकास नीतियां : कमियां, चुनौतियां और नई दिशाएं विषय पर 18 और 19 सितंबर को आयोजित संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से आए शिक्षाविदों, विशेषज्ञों, शिक्षकों और शोधार्थियों ने जनजातीय विकास से जुड़े विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया। उद्घाटन सत्र के पहले दिन मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता यूनेस्को की सह अध्यक्ष व जेएनयू की प्रोफेसर डॉ सोनाझरिया मिंज रहीं। उन्होंने जनजातीय विकास को केवल योजनाओं और आंकड़ों तक सीमित न रखते हुए समुदाय की वास्तविक सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के संदर्भ में देखने पर जोर दिया। उन्होंने जनजातीय समुदायों की भागीदारी, अधिकारों और स्थानीय परिस्थितियों को विकास नीतियों में पर्याप्त महत्व देने की आवश्यकता बताई।
संगोष्ठी के संयोजक डॉ राज कुमार ने स्वागत भाषण में कहा कि आयोजन का उद्देश्य जनजातीय विकास नीतियों में मौजूद कमियों और चुनौतियों को अकादमिक विमर्श के केंद्र में लाना तथा इनके समाधान के लिए नई दिशाओं पर विचार करना है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ गौरव शुक्ला ने कहा कि विश्वविद्यालय समाजोपयोगी शोध को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। कुलसचिव डॉ. मुनीष गोविंद ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी ज्ञान के प्रसार के साथ सामाजिक चुनौतियों पर शोध और सार्थक संवाद का वातावरण तैयार करना भी है। समकुलपति डॉ एसआर रथ ने जनजातीय समाज से जुड़े विषयों पर निरंतर शोध और संवाद की आवश्यकता बताई। उद्घाटन सत्र में संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
पहले दिन पैनल प्रस्तुति में आन्नदा कॉलेज, हजारीबाग के समाजशास्त्र की प्राध्यापिका डॉ ललिता राणा, सिद्धो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका के हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ यदुवंश यादव और ऑनलाइन माध्यम से प्रोफेसर डॉ मिनाकेतन बेहरा ने जनजातीय विकास नीतियों के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे। पैनल की अध्यक्षता डॉ बिनोद कुमार ने की।
तकनीकी सत्रों में पांचवीं अनुसूची, संवैधानिक संरक्षण, जनजातीय उपयोजना, पेसा अधिनियम-1996, भूमि अधिकार, विस्थापन तथा विकास परियोजनाओं के सामाजिक प्रभाव जैसे विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
दूसरे दिन पैनल प्रस्तुति में सीवी रमन विश्वविद्यालय, बिलासपुर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अनुपम कुमार तिवारी, एनसीडीएस, भूवनेश्वर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राज कुमार खोसला और ऑनलाइन माध्यम से प्रवासी अध्ययन, केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ नरेश कुमार ने विचार रखे। इनके वक्तव्यों में जनजातीय विकास को स्थानीय जरूरतों, सामाजिक परिस्थितियों और प्रभावी नीति क्रियान्वयन से जोड़ने पर जोर रहा।
इसके बाद वन अधिकार अधिनियम-2006, सामुदायिक वन अधिकार, जनजातीय आजीविका, स्थानीय अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित हुए। आगे के सत्रों में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय संकट, डिजिटल शासन, तकनीकी समावेशन, जनजातीय पहचान, संस्कृति और स्वदेशी ज्ञान प्रणाली पर भी शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के उप निदेशक अजय राज खलखो ने जनजातीय विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, अधिकार और स्थानीय आवश्यकताओं को नीति निर्माण के केंद्र में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शोध संस्थानों, सरकार और समाज के बीच बेहतर समन्वय से जनजातीय विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
समापन अवसर पर डॉ राज कुमार ने दो दिनों की गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
समापन सत्र में विशेष अतिथि संतोष सरकार और नरेंद्रनाथ टिकादार (आईसीएसएसआर-ईआरसी) ने भी विचार रखे। प्रतिभागियों ने संगोष्ठी को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कीं। मंच संचालन डॉ प्रीति व्यास व कोमल पल्लवी भेंगरा व धन्यवाद ज्ञापन डॉ राजकुमार ने किया। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ।
कार्यक्रम को सफल बनाने में एंकर समिति की
डॉ प्रीति कुमारी, फरहीन सिद्दीकी, कोमल पल्लवी भेंगरा, मंच समितिसे पंकज प्रज्ञा, डॉ नागेश्वरी कुमारी,
डॉ रुचि कुजूर, प्रियंका कुमारी, मानसी प्रधान
दीप प्रज्वलन समिति से पंकज प्रज्ञा, डॉ. नागेश्वरी कुमारी, स्वागत समिति से
प्रति-कुलपति
निदेशक, व्यावसायिक शिक्षा संयोजक
सह-संयोजक
सभी अधिष्ठाता (डीन)
अनुशासन समिति से
हिमांशु चौधरी, उदय रंजन, डॉ. रितेश कुमार, संजय कुमार, आदित्य कुमार, मुकेश कुमार, विपणन अधिकारी, डॉ नागेश्वरी, बिशाखा बाला, पंजीकरण समिति से रवि कांत गौतम कुमार, सत्यार्थी ज्ञान प्रकाश, सबिता कुमारी, सृष्टि, रिपोर्ट लेखन समिति से डॉ रितेश कुमार, डॉ सुजीत कुमार, कोमल पल्लवी भेंगरा, फरहीन सिद्दीकी, तकनीकी समिति से एफओ सौरभ सरकार,
राजेश कुमार, संजय सिंह
प्रमोद कुमार, मीडिया समिति से मो शमीम अहमद, रोहित राणा, आयोजन स्थल एवं आवास व्यवस्था समिति से राकेश कुमार (डीआर), अमित कुमार (एआर), भोजन समिति से उदय रंजन श, डॉ. सत्य प्रकाश, रोहित लाल, मुकेश कुमार, मुन्ना कुमार, राहुल राजवार
शिवम कुमार, आयुष, ऑनलाइन सत्र समिति
अजय कुमार, विजय लाल, परिवहन समिति से राकेश मिश्रा उप-पंजीयक
हिमांशु चौधरी
सूरज कुमार कुशवाहा सहित अन्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा