कला, साहित्य, संस्कृति के में विश्वबंधुत्व का मंगल-संकल्प 'विश्वरंग पटना–2026

Event Time & Date - Wed, October 07,2026
कला, साहित्य, संस्कृति के में विश्वबंधुत्व का मंगल-संकल्प 'विश्वरंग पटना–2026
विश्व रंग' से मिलेगी जे़न जी को नई रचनात्मक और सकारात्मक दिशा—श्री मिथिलेश तिवारी, शिक्षा मंत्री, बिहार शासन
भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध भूमि बिहार में विश्व रंग महोत्सव का भव्य आयोजन ऐतिहासिक क्षण है–श्री प्रमोद कुमार, मंत्री, खान एवं बहु तत्व, कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार शासन
उनके हिस्से का प्रेम’ और ‘लेखक बनाने वाले’ में दिखा प्रेम, महत्वाकांक्षा और साहित्य में बाजारवाद का बढ़ता वर्चस्व
बिहार के लोकरंगों में सजी विश्व रंग की शोभायात्रा
प्रेमचंद रंगशाला में स्थापित होगी प्रेमचंद की विशाल प्रतिमा
विश्व रंग फाउंडेशन, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय तथा डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, वैशाली, बिहार की मेजबानी में आयोजित विश्व के सबसे अनूठे अंतरराष्ट्रीय महोत्सव 'विश्व रंग पटना–2026' में भारत के विभिन्न प्रांतों के साथ विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता ने इसे साकार वैश्विक स्वरूप प्रदान किया। प्रेमचंद रंगशाला, पटना का विशाल परिसर साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों, लोकधुनों, रंगों, रचनात्मक ऊर्जा और आत्मीय मिलन से देर तक आलोकित रहा। चारों ओर उमंग थी, उत्साह था और एक-दूसरे को जानने-समझने की उत्कट आकांक्षा थी।
*बिहार के लोकरंगों में सजी विश्व रंग की शोभायात्रा*
विश्व रंग पटना के अंतर्गत रंगारंग शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को एक बहुरंगी सांस्कृतिक उत्सव में बदल दिया। बिहार की लोककला के प्रतिनिधि दल अपनी पारंपरिक वेशभूषा में सजे, लोकधुनों पर थिरकते हुए आगे बढ़े तो लगा मानो बिहार की मिट्टी स्वयं अपने लोकजीवन की कथा कहने जमीं पर उतर आई हो।
लोकनृत्यों की थिरकन, लोकवाद्यों की गूँज, रंग-बिरंगे परिधान और कलाकारों के उल्लासपूर्ण चेहरे—सब मिलकर भारतीय सांस्कृतिक विविधता का ऐसा जीवंत चित्र रच रहे थे, जिसमें अनेक रंग थे, पर आत्मा एक थी। विश्व रंग शोभायात्रा ने यह संदेश भी दिया कि संस्कृति केवल संग्रहालयों में सुरक्षित कोई अतीत नहीं, बल्कि लोकजीवन की धड़कनों में आज भी जीवित वर्तमान है।
*संस्कृति के महायज्ञ में विश्वबंधुत्व का मंगल-संकल्प*
समूचे संसार के लिए मनुष्यता, सद्भाव और सांस्कृतिक एकात्मता की मिसाल बन चुके इस महायज्ञ 'विश्व रंग पटना-2026' का शुभारंभ माननीय श्री प्रमोद कुमार, मंत्री, खान एवं भूतत्व तथा कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के मुख्य आतिथ्य और ‘विश्व रंग’ के स्वप्नदृष्टा संतोष चौबे की गरिमामय उपस्थिति में हुआ।
इस अवसर पर माननीय मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि बिहार की धरती ज्ञान, संतों, महात्माओं, साहित्यकारों और कला प्रेमियों की भूमि रही है। ऐसी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत वाली भूमि पर विश्व रंग का आयोजन होना अपने आप में महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि विश्व रंग ने कला, संस्कृति, साहित्य और भाषाओं को एक ऐसा साझा मंच प्रदान किया है, जहाँ भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराएँ वैश्विक संवाद का हिस्सा बन रही हैं। यह आयोजन बिहार की सांस्कृतिक पहचान को भी एक नया विस्तार और नया रंग दे रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि भाषा कोई भी हो, लेकिन भारतवासी की आत्मा और सांस्कृतिक चेतना एक है। हमारी भाषाई विविधता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। भारत की संस्कृति ने सदैव विभिन्न भाषाओं, परंपराओं और विचारों को साथ लेकर चलने का संदेश दिया है। संस्कृति ही राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करती है और समाज को अपनी जड़ों से जोड़ती है।
उन्होंने विश्व रंग के निदेशक संतोष चौबे के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विश्व रंग केवल साहित्य और कला का आयोजन नहीं, बल्कि संस्कृतियों के बीच संवाद स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। ऐसे आयोजन समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया को नई दृष्टि, नई संवेदना और नई रचनात्मक दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने विश्व रंग के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
*जेन जी को विश्व रंग से मिलेगी नई रचनात्मक और सकारात्मक दिशा—श्री मिथिलेश तिवारी, शिक्षा मंत्री, बिहार शासन*
इस अवसर पर बिहार शासन के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि आज की जेन जी पीढ़ी तकनीक और मोबाइल के अत्यधिक प्रभाव के कारण पुस्तकों, साहित्य, कला और अपनी संस्कृति से दूर होती जा रही है। ऐसे समय में विश्व रंग जैसे आयोजन युवाओं को नई सकारात्मक दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि संतोष चौबे जी ने विश्व रंग के माध्यम से जेन जी को मोबाइल की दुनिया से बाहर निकालकर साहित्य, पुस्तकों, कला और संस्कृति से जोड़ने का अद्भुत कार्य किया है। यह पहल केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और ज्ञान परंपरा से जोड़ने का सार्थक प्रयास है।
शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि बिहार सदियों से ज्ञान, शिक्षा और संस्कृति की धरती रहा है और विश्व रंग का यहाँ आना इस परंपरा को और समृद्ध करेगा। उन्होंने संतोष चौबे जी के रचनात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विश्व रंग युवाओं में रचनात्मकता, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उद्घाटन अवसर पर विश्व रंग के निदेशक संतोष चौबे ने कहा कि शिक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम मातृभाषा है और आज आवश्यकता है कि हिंदी को केवल भाषा के रूप में नहीं, बल्कि एक कौशल के रूप में भी देखा जाए। उन्होंने कहा कि हमारी भाषाएँ हमारी संवेदना, संस्कृति और ज्ञान की वाहक हैं। इसी दृष्टि से हमारे विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप अनुवाद केंद्र, नाट्य केंद्र, चित्रकला केंद्र सहित विभिन्न रचनात्मक और ज्ञानपरक गतिविधियों का विस्तार तेजी से किया जा रहा है।
*प्रेमचंद रंगशाला में स्थापित होगी प्रेमचंद की विशाल प्रतिमा*
विश्व रंग के निदेशक एवं वरिष्ठ कथाकार संतोष चौबे ने कहा कि प्रेमचंद की स्मृतियों से जुड़े इस स्थान पर विश्व रंग का आयोजन होना हमारे लिए गौरव की बात है। विश्व रंग की ओर से यहाँ मुंशी प्रेमचंद की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। प्रेमचंद हमारे साहित्यिक पूर्वज हैं और उनकी रचनाशीलता, संवेदना तथा सामाजिक दृष्टि से हमें निरंतर प्रेरणा लेनी चाहिए। अपने पूर्वजों का सम्मान करना और उनकी विरासत को आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है।
संतोष चौबे ने आगे कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में हमें केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता नहीं, बल्कि वास्तविक बुद्धिमत्ता की भी उतनी ही आवश्यकता है। यह वास्तविक बुद्धिमत्ता कला, साहित्य, संस्कृति और मानवीय अनुभवों से विकसित होती है। उन्होंने कहा कि ज्ञान के साथ संवेदना और सामवेदना का होना भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि मनुष्य को पूर्ण बनाने का काम केवल सूचना नहीं, बल्कि संवेदनशीलता करती है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आज बिहार से विश्व रंग के रूप में जो प्रकाश प्रज्वलित हुआ है, वह आगे चलकर दूर तक अपनी रोशनी फैलाएगा। यह प्रकाश भारतीय भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति को नई दिशा देगा तथा भारत को नए उजाले की ओर ले जाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर विश्व रंग कैटलॉग, चतुर्वेदी समाज की सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर 12 खंडों में प्रकाशित ग्रंथों का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. विनीता चौबे, संपादक, इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए, डॉ. विजय सिंह, कुलपति, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, भोपाल, डॉ. समित तिवारी, कुलपति, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, वैशाली, बिहार मंच पर अतिथि के रूप में मौजूद रहें। कुलसचिव, सीवीआरयू, वैशाली डॉ. ब्रजेश सिंह ने आभार व्यक्त किया।
*8 वीं टैगोर कला कार्यशाला 2026 में सैकड़ों विद्यार्थियों ने की रचनात्मक भागीदारी*
टैगोर कला केंद्र, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल एवं सी वी रमण विश्वविद्यालय, वैशाली एम विश्वरंग फाउंडेशन की ओर से आयोजित एवं कला एवं शिल्प महाविद्यालय पटना एवं पटना संग्रहालय पटना के सहयोग की ओर से 8वीं टैगोर बाल कला कार्यशाला का आयोजन हुआ।
इस कार्यशाला में बच्चों को चित्रकला, मूर्तिकला, प्रिंट मेकिंग एवं फोटोग्राफी के विभिन्न पक्षों से अवगत कराया गया एवं बच्चों को हैंड्स ऑन एक्सपीरियंस भी प्रदान किया है। इस कार्यशाला में बतौर मेंटर श्री शैलेन्द्र कुमार ( वरिष्ठ फोटोग्राफर, पटना) डॉ अजय कुमार पाण्डेय ( वरिष्ठ मूर्तिकार, पूर्व प्रधानचार्य, कला एवं शिल्प महाविद्यालय पटना), डॉ राखी कुमारी ( वरिष्ठ प्रिंट -मेकर एवं प्रधानचार्य, कला एवं शिल्प महाविद्यालय पटना), सुश्री संगीता ( वरिष्ठ चित्रकार, पटना ) उपस्थिति हुए और बच्चों के साथ काम किया। सुबह 10 बजे से यह कार्यशाला दोपहर 2 बजे तक चला। फिर सभी मेंटर, उपस्थित शिक्षक एवं पैरेंट्स का स्वागत श्री अशोक भौमिक (वरिष्ठ चित्रकार, लेखक एवं कला समीक्षक, दिल्ली) द्वारा किया गया। एवं सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।
इस अवसर कला समीक्षक श्री सुमन कुमार सिंह, श्री मनोज बच्चन, श्री सुनील कुमार, डॉ सुमन पांडे, श्री सुनील सिंह सहित बड़ी संख्या में कलाकार एवं शोधार्थी उपस्थित रहें।
डॉ. सी वी रमन विश्वविद्यालय, वैशाली की ओर से अविनाश, सन्नी, आदित्य एवं हरिओम एवं प्रशांत कुमार पोद्दार (असिटेंट प्रोफेसर - सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट) ने कार्यक्रम के सुगम संचालन में महती भूमिका अदा की।
कार्यक्रम के संयोजक डा अर्जुन कुमार सिंह ( विभागाध्यक्ष, टैगोर स्कूल ऑफ फाइन एंड परफार्मिंग आर्टस स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय भोपाल) ने बच्चों और कला गुरुओं के बीच हुए जुगलबंदी को भविष्य के शुभ संकेत के रूप में रेखांकित किया और कहा कि विश्वरंग का उद्देश्य सभी बच्चों में प्रतिभा को एक वैश्विक मंच देना है जिससे हमारी भविष्य की पीढ़ी देश के सपने को साकार कर सके।
धन्यवाद ज्ञापन - डॉ अजय कुमार पाण्डेय ने कला एवं शिल्प महाविद्यालय पटना की ओर से किया।
*‘उनके हिस्से का प्रेम’ और ‘लेखक बनाने वाले’ में दिखा प्रेम, महत्वाकांक्षा और साहित्य में बाजारवाद का बढ़ता वर्चस्व*
*विश्व रंग पटना के समापन अवसर पर ‘संभव’ आर्ट ग्रुप, दिल्ली ने किया संतोष चौबे की दो चर्चित कहानियों का मंचन*
विश्वरंग 2026 के समापन अवसर पर प्रेमचंद रंगशाला, पटना में संतोष चौबे की दो कहानियों “उनके हिस्से का प्रेम / लेखक बनाने वाले” का प्रभावशाली मंचन किया गया। कहानी मंचन के पुरोधा एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) के पूर्व निदेशक, प्रख्यात रंग निर्देशक देवेन्द्र राज अंकुर के निर्देशन में हुई इन प्रस्तुतियों को दिल्ली के ‘संभव’ आर्ट ग्रुप के कलाकारों ने अपने जीवंत अभिनय से मंच पर साकार रूप प्रदान किया।
*उनके हिस्से का प्रेम*
पहली प्रस्तुति *‘उनके हिस्से का प्रेम’* में एक संस्थान के बॉस के प्रेम संबंधों को अनूठे रंगमंचीय प्रयोग के माध्यम से सामने लाया गया। कहानी में ऑफिस की मेज, कलम, शीशा, कुर्सी और डायरी जैसे निर्जीव दिखाई देने वाले उपकरण उसके प्रेम संबंधों के साक्षी और पड़ताल करने वाले पात्रों की तरह उभरते हैं। इन वस्तुओं के माध्यम से बॉस के आधे-अधूरे प्रेम संबंधों की कहानी जिस तरह दर्शकों के सामने आती है, वह प्रस्तुति का विशेष आकर्षण रही।
*लेखक बनाने वाले*
दूसरी प्रस्तुति *‘लेखक बनाने वाले’* में लेखकीय महत्वाकांक्षा और साहित्य में बढ़ते बाजारवाद के वर्चस्व को बेनकाब किया गया। कहानी का मुख्य पात्र बैंक में नौकरी करने वाला व्यक्ति है, जो लिखता रहता है और लेखक बनने की इच्छा रखता है। अखबार में दिल्ली के एक ‘लेखक बनाओ केंद्र’ का विज्ञापन देखकर वह वहाँ पहुँचता है। केंद्र उससे पैसे लेकर उसकी एक सामान्य कविता को तैयार करवाने और उसकी झूठी प्रशंसा करने का प्रयास करता है। इस अनुभव से निराश और आक्रोशित होकर वह वहाँ से लौटता है और महसूस करता है कि लेखक बनाने के नाम पर ऐसे केंद्र लोगों की भावनाओं और लेखकीय आकांक्षा को पैसा कमाने का जरिया बना रहे हैं। कहानी इसी विडंबना और धोखे को व्यंग्यात्मक ढंग से सामने रखती है।
दोनों प्रस्तुतियों में संतोष चौबे की कहानियों की विशिष्ट संवेदना और व्यंग्य को देवेन्द्र राज अंकुर की रंगमंचीय दृष्टि के माध्यम से प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया गया। वस्तुओं को कथानक का हिस्सा बनाना और सामान्य जीवन की स्थितियों के भीतर छिपे सामाजिक द्वंद्व को मंच पर उभारना इन प्रस्तुतियों की खास विशेषता रही। उल्लेखनीय है कि संतोष चौबे ने 'लेखक बनाने वाले' कहानी नब्बे के दशक में लिखी थी, तब एआई की सुगबुगाहट भी नहीं थी। उन्होंने इतने वर्षों पहले ही आज के समय की नब्ज को भाँप लिया था।
दोनों ही कहानियों के मंचन में वरिष्ठ रंगकर्मी अमिताभ श्रीवास्तव, अमित सक्सेना, सहज हरजाई, प्रकाश झा, गौरी देवल, रचिता वर्मा ने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। संगीत संचालन के माध्यम से आदित्य पटेल तथा प्रकाश परिकल्पना एवं संचालन के जरिए राघव प्रकाश एवं राहुल चौहान ने दोनों कहानियों के मंचन को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की। प्रस्तुतियों के अंत में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे, इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए की कार्यकारी संपादक डॉ. विनीता चौबे द्वारा सभी कलाकारों का स्वागत किया गया। मंच संचालन टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के निर्देशक अविजित सोलंकी ने किया।
इस अवसर पर संतोष चौबे जी की कहानियों के अब तक हुए मंचन और पुस्तकों के लोकार्पण पर केंद्रित चित्रों एवं विश्व रंग पर केंद्रित चित्रों की एक्जीबिशन भी प्रशांत सोनी, रोहित श्रीवास्तव, योगेश कुमार द्वारा लगाई गई। आईसेक्ट पब्लिकेशन का बुक स्टॉल श्याम दुबे एवं अशोक कनाड़े द्वाराः लगाया गया। कहानी मंचन के दौरान मंच संचालन टैगोर नाट्य विद्यालय के निर्देशक अविजित सोलंकी द्वारा किया गया। मंचन के दौरान पूरा सभागार सैकड़ों रंगकर्मियों, कलाकारों, नाट्यप्रेमी दर्शकों से खचाखच भरा रहा।
नाट्य प्रस्तुति के साथ विश्वरंग 2026 पटना के दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में साहित्य, कला, लोक संस्कृति और रंगमंच की विविध विधाओं का समावेश हुआ।
*फिर मिलेंगे’ की उजली उम्मीद...*
महोत्सव का समापन भी अपने भीतर एक नई शुरुआत का बीज सँजोए था। विदा के क्षणों में आँखों में ठहरी आत्मीयता, हाथों में हाथ और मन में फिर मिलने की आकांक्षा—मानो पूरा वातावरण यही कह रहा हो कि यह यात्रा का एक पड़ाव भर है... मंजिल की और निरंतर अग्रसर है विश्वरंग की वैश्विक यात्रा।



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