आईसेक्ट विश्वविद्यालय हजारीबाग में मनाई गई कथाकार जगन्नाथ प्रसाद चौबे 'वनमाली' की जयंती

Event Time & Date - Sat, August 01,2026
आईसेक्ट विश्वविद्यालय हजारीबाग में मनाई गई कथाकार जगन्नाथ प्रसाद चौबे 'वनमाली' की जयंती
आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग में शनिवार को हिंदी साहित्य के सुप्रतिष्ठित कथाकार, शिक्षाविद् एवं चिंतक जगन्नाथ प्रसाद चौबे 'वनमाली' की जयंती श्रद्धा एवं गरिमामय वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन वनमाली सृजन पीठ एवं आईसेक्ट विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के बैनर तले किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति डॉ गौरव शुक्ला, कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद, समकुलपति डॉ एसआर रथ, उपकुलसचिव ललित मालवीय, एनएसएस पदाधिकारी डॉ प्रीति व्यास एवं अन्य के हाथों दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
इस अवसर पर वनमाली के साहित्यिक अवदान, मानवीय दृष्टि तथा भारतीय समाज और संस्कृति के प्रति उनके योगदान को स्मरण करते हुए वक्ताओं ने उन्हें हिंदी कथा-साहित्य का विशिष्ट हस्ताक्षर बताया। कुलपति डॉ गौरव शुक्ला ने कहा कि वनमाली का साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को संवेदनशील, जागरूक और मानवीय बनाने का सशक्त अभियान है। उनकी कहानियां जीवन के यथार्थ को सरल भाषा में प्रस्तुत करती हैं और नई पीढ़ी को सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा देती हैं।
कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने कहा कि किसी भी समाज की सांस्कृतिक चेतना उसके साहित्य से निर्मित होती है। वनमाली की रचनाएं मानवीय मूल्यों, सामाजिक सरोकारों और संवेदनशीलता की अमूल्य धरोहर हैं। विद्यार्थियों को उनके साहित्य का अध्ययन कर जीवन में नैतिक मूल्यों को आत्मसात करना चाहिए।
समकुलपति डॉ एसआर रथ ने कहा कि वनमाली ने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज के वंचित, उपेक्षित और सामान्य जन के जीवन को साहित्य का केंद्र बनाया। उनकी रचनाएं आज भी सामाजिक समरसता, करुणा और मानवीय संवेदनाओं को सुदृढ़ करने का संदेश देती हैं। कार्यक्रम के दौरान ओम प्रकाश दास, कुमारी सीमा, प्रीति वर्मा, नेहा सिन्हा, डॉ प्रीति व्यास, ललित मालवीय सहित अन्य प्राध्यापकों तथा निशांत सिंह सहित छात्र-छात्राओं ने वनमाली के साहित्य और मानवीय मूल्यों पर आधारित अपनी-अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ किया। कविताओं के माध्यम से साहित्य, संस्कृति और सामाजिक संवेदनशीलता का प्रभावी संदेश दिया गया। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ प्रीति व्यास ने किया। अंत में मौजूद सभी संकायाध्यक्ष व विभागाध्यक्ष, सहायक प्राध्यापक-प्राध्यापिकाएं व कर्मियों ने वनमाली के आदर्शों पर चलने तथा साहित्य के माध्यम से मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संकल्प लिया।
वनमाली : एक परिचय
जगन्नाथ प्रसाद चौबे 'वनमाली' हिंदी साहित्य जगत के सुप्रतिष्ठित कथाकार, शिक्षाविद् और चिंतक थे। उनका जन्म 1 अगस्त 1912 को मध्यप्रदेश के आगर में हुआ। वर्ष 1934 में उनकी पहली कहानी 'जिल्दसाज़' प्रतिष्ठित पत्रिका 'विश्वमित्र' में प्रकाशित हुई। इसके बाद लगभग चार दशकों तक उनकी कहानियां सरस्वती, कहानी, विशाल भारत, लोकमित्र, भारती, माया और गांधी जैसी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहीं। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाएं, ग्रामीण जीवन, सामाजिक विषमताएं और गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण प्रमुख रूप से दिखाई देता है। आचार्य नंददुलारे वाजपेयी ने उनकी चर्चित कहानी 'आदमी और कुत्ता' को श्रेष्ठ कहानियों के संकलन में स्थान दिया था।
वनमाली ने लगभग सौ से अधिक कहानियां, व्यंग्य, निबंध और अन्य साहित्यिक रचनाएं लिखीं। वे एक कुशल शिक्षाविद् भी थे और मध्यप्रदेश के शिक्षा विभाग में विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए वर्ष 1962 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के हाथों राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनका निधन 30 अप्रैल 1976 को भोपाल में हुआ। उनकी स्मृति में स्थापित वनमाली सृजन पीठ आज भी साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के संरक्षण तथा नई पीढ़ी में रचनात्मक चेतना के प्रसार का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।






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