शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार तथा कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के बीच दो जून 2026 को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते पर भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ एसएन सुशील तथा आईसेक्ट विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने हस्ताक्षर किए।
इस दौरान विश्वविद्यालय के समकुलपति डॉ एसआर रथ, कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ अरविंद कुमार, सहायक प्राध्यापक डॉ सुजीत कुमार पटेल सहित दोनों संस्थानों के अधिकारी एवं वैज्ञानिक उपस्थित रहे। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान की ओर से पादप शरीर क्रिया विज्ञान एवं जैव रसायन विभाग के प्रमुख डॉ एमके श्रीवास्तव तथा संस्थान प्रौद्योगिकी प्रबंधन इकाई की प्रभारी डॉ स्वप्ना एम सहित अन्य कर्मियों ने सहभागिता की।
समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, छात्र एवं शिक्षक आदान-प्रदान, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, तकनीकी विशेषज्ञता के साझा उपयोग तथा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य करेंगे।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान का शैक्षणिक भ्रमण भी किया। भ्रमण के दौरान उन्हें गन्ना अनुसंधान, आधुनिक कृषि तकनीकों, प्रयोगशाला सुविधाओं तथा विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी दी गई। इससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान के साथ कृषि अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से भी परिचित होने का अवसर मिला।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ गौरव शुक्ला ने कहा कि यह समझौता विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा, जो कृषि क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को गति प्रदान करेगा। कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने कहा कि दोनों संस्थानों के बीच स्थापित यह सहयोग ज्ञान, तकनीक और संसाधनों के आदान-प्रदान को सशक्त बनाएगा तथा विद्यार्थियों को व्यवहारिक अनुभव प्राप्त होगा।
समकुलपति डॉ एसआर रथ ने कहा कि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में ऐसे सहयोगात्मक प्रयास विद्यार्थियों के कौशल विकास के साथ कृषि क्षेत्र में नवाचार को भी नई दिशा देंगे। कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ अरविंद कुमार ने कहा कि यह एमओयू विद्यार्थियों को कक्षा के ज्ञान के साथ अनुसंधान और तकनीक का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेगी।
उल्लेखनीय है कि यह साझेदारी उच्च शिक्षा और कृषि अनुसंधान के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।